ऋषिकेश। तीर्थनगरी के गंगा घाटों पर रविवार सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। देश के विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान किया और पितृ पक्ष पर अपने पितरों का तर्पण और पिंडदान किया। श्रद्धालुओं ने ब्राह्मणों का आशीर्वाद प्राप्त किया और जरूरतमंदों को भोजन वितरण कर पुण्य अर्जित किया।
सूतक काल के कारण तर्पण-पिंडदान रुके
हालांकि, दोपहर बाद चंद्रग्रहण के सूतक काल लगते ही पितृ अनुष्ठान रोक दिए गए। मान्यता के अनुसार सूतक और ग्रहण काल में धार्मिक कर्मकांड और भोजन निषिद्ध होते हैं। इस कारण गंगा घाटों पर सुबह से चल रहे तर्पण और पिंडदान कर्मकांड अस्थायी रूप से स्थगित कर दिए गए।
प्रमुख मंदिरों में कपाट बंद
चंद्र ग्रहण से पहले तीर्थनगरी के प्रमुख मंदिरों—नीलकंठ महादेव, सोमेश्वर महादेव, वीरभद्र महादेव, प्राचीन रघुनाथ, सिद्धपीठ हनुमान और दुर्गा मंदिर—में दोपहर 12 बजे ही पूजन-अर्चना और आरती पूर्ण कर कपाट बंद कर दिए गए।
पंडित वेदप्रकाश शास्त्री ने बताया कि रविवार रात 9 बजे से लगने वाले चंद्र ग्रहण के सूतक काल की शुरुआत लगभग नौ घंटे पहले ही हो गई थी।
ग्रहण समाप्ति के बाद पूजा पुनः शुरू
मंदिरों में ग्रहण समाप्त होने के बाद सोमवार प्रातः 4 बजे शुद्धिकरण के बाद कपाट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोले जाएंगे। भगवान को स्नान और भोग अर्पित करने के बाद ही अनुष्ठान पुनः प्रारंभ होंगे।
गंगा आरती और वाहन संचालन भी प्रभावित
- त्रिवेणीघाट, स्वर्गाश्रम, मुनि की रेती, तपोवन और लक्ष्मणझूला क्षेत्र में होने वाली दैनिक गंगा आरती भी ग्रहण के कारण स्थगित कर दी गई।
- नीलकंठ मंदिर के कपाट बंद होने के बाद लक्ष्मणझूला टूरिस्ट टैक्सी ऑनर्स एसोसिएशन ने वाहनों का संचालन भी रोक दिया। एसोसिएशन के अध्यक्ष भगत सिंह पयाल ने बताया कि रविवार अपराह्न 1 बजे से वाहन संचालन बंद कर दिया गया और सोमवार से यह नियमित रूप से चलेंगे।
